गुरुवार, 18 नवंबर 2010

जय जय तेरी गुरू कबीरा, अमृत तेरा जरा सा जिरा...."प्यास"

जय जय तेरी गुरू कबीरा,
अमृत तेरा जरा सा जिरा
कोयले का काम देख,
बस हार ही जाये हिरा ...."प्यास"
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जमा करना, भारी गवाना..
उभरने में तगडी ताकत लगी
उभर कर भय की लत लगी......"प्यास"
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परिणाम प्रमाण है

शेतानी में इतना सच है
इश्वर सम्मुख सचमुच है

इन्शान का इतना सच है
तुझ में इश्वर सचमुच है...."प्यास"
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शुभ दिपावली
जन जन छ्ण छ्ण दानी
दिवाली दान देने दिवानी....."प्यास’
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समझो, समझाओ
जान रख न रह सका जानदार/
जानबुझ कर जान रखे उधार//...."प्यास"
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समझो तो समझानाजो...

नजरो में नजर आये...
क्या सच में नजर आये....
हकिकत में ख्वाब व...
ख्वाब में हकिकत...
क्यो कर न नजर आये...."प्यास"
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वही वही सही सही

मालिक का ही मकान है..
जन जन उसी की जान है...."प्यास"
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प्यास की पहचान, हर प्यासा ले जान....

नग्न आओ तो हो नाच नग्न....
न ही तो नाचे अंग अंग अग्न....."प्यास"...

मुशकिल है ना पहचान....

सच में सरलता...
झूठ झंझट लता....."प्यास"....
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मचल से बच, जीयेगा सच सच....

जो इख्तियार में है, उसी की खोज होनी चाहिये....
रूह को तकलीफ नहीं, तसल्ली रोज होनी चाहिये......"प्यास"
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बला का बेवफाई का बल है, हर बला में...

जो कर गये इश्क, एक खुबसुरत बला से....
कह गयी जहन्नम में जाओ मेरी बला से....."प्यास"....

अब की बला, बला की बलाये ले है....
अमरबेल की सारी सारी कलाये ले है....."प्यास"...

बला का बलम है...
जो मेरी कलम है....."प्यास"...

बला, बला की बलबान....,तो हम उसकी बलम जान......

बला में बला की बेकरा्री है, बला का बल ले....
मेरी बला से, बला वह आज ले या कल ले....."प्यास"...

जमा करना, भारी गवाना..