सोमवार, 22 अगस्त 2011




शुभ प्रभाती सबसे बोलो
हर का, हरि मन हरलो
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सफलता प्रबंधन, सुख प्रबंधन, रिस्तों प्रबंधन, जीवन प्रबंधन, घटना, घटक घटक प्रबंधन का परम तंत्र है
आप अगर अपनी दुनिया में कुछ अदभुद करना चाहते है तो "शुभ प्रभाती" सबसे बोलो
आप अगर अपनी दुनिया में पग पग सफलता चाहते हो, तो "शुभ प्रभाती" सबसे बोलो
पर शुभ प्रभाती बोल, बिन किसी द्वेश, बिन किसी कपट, के आथ निकलने चाहिये
इस्से आपका खुद का स्वभाव व चरित्र में अच्छा, सुंदर बदलाव आयेगा
लोगो का आपकी तरफ़ रूझान सकारातमक होगा, आदर व प्रेम व मदत रूप ले होगा
आपको जीना सुखमय लगेगा, हमैशा मुस्कान बनी रहेगी..... आदि आदि
आप कोशिश करीये, 1 साल के अंदर नतीजा जरूर मिलेगा
पर सच्चे मन से, बिन द्वेष, बिन संकोच, जो सामने आये सभी से, और सही जवाब की अपेक्षा बिन
कोई जवाब वापस दे न दे, पर आप मूल कर्तव्य की भाती करते रहे
इन निचे लिखी पंक्तियों को पढे व शूभ प्रभाती, शुभ दुपहरिया, शुभ संध्या, शुभ रात्री के शुभ शुभ गुण समझे

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देखना चाहते हो सूरते मुस्कराती
सभी से कहते चलो शुभ प्रभाती

देखना चाहते, किस्मत करामाती
सभी से कहते रहो, शुभ प्रभाती

देखना चाहते, किस्मत चमचमाती
सभी से कहते रहो, शुभ प्रभाती

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द्वेष रहित मुस्कुराहट होती
तो हो ती सही शुभ प्रभाती


"प्यास" को पराजित कर
सबसे बोलो शुभ प्रभाती -

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सफलता का एक राज
मधुर मधुर हो आवाज
सबसे बोलो शुभ प्रभाती
सहज, द्वेष रहित भाती
बन ही जाते काम काज

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शुभ प्रभाती सबसे बोलो
द्वेष रहित दिल को खोलो

शुभ दुपहरिया सबसे बोलो
तन कंचन सी धूप में धोलो

शुभ संध्या सबसे बोलो
प्रीत तुम मन में घोलो

शुभ रात्रि सबसे बोलो
प्रभु "प्यास" ले चैन से सो लो

शुभ शुभ सबसे बोलो
शुभ्रता लिये जीवन जीलो

द्वेष रहित मुस्कुराहट होती
तो होती सही शुभ प्रभाती

"प्यास" को पराजित कर
सबसे बोलो शुभ प्रभाती

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उठो उठो जी, करो न गलती
कह दो जन जन से शुभ प्रभाती

जीवन से ही जीवन सुख पाये
अब देखो कैसे खुशहाली आती

प्यास रहे बस आती जाती

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निशा ने निशानी छोडी
प्रभा क्यो बैठे निगोडी
बोल ही लो शुभ प्रभाती
द्वेशो को मार हथोडी

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सबसे बोलो शुभ प्रभाती
बनो उजाला देती बाती
जलने, मिटने को भूलो

हर हरि हरैया गा लो
हर हरि इच्छा बोलो

बस सुख चैन में खो लो
होगी बस मौक्ष प्राप्ति

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सब से बोलो शुभ प्रभाती

जीवन का परम मन्त्र
सफलता का बस तन्त्र

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सब से बोलो शुभ प्रभाती
प्रकट हो तममें प्रभु प्रवृति

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सब से बोलो शुभ प्रभाती
दिखेंगी मुस्कराहटें पास आती

कम होंगे अहम, द्वेष, रोष
दुनिया होगी खुशियॉ उगाती

जीवन में होगा अब पानी पानी
"प्यास" भी नहीं नाच नचाती

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सबसे बोलो शुभ प्रभाती
भय भूतनी नहीं भरमाती

सबसे बोलो शुभ प्रभाती
प्रकट हो पल पल प्रगती

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सबसे बोलो शुभ प्रभाती
उषा तो देख देख मुस्कराती
निशा भी है साथ निभाती

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सबसे बोलो शुभ प्रभाती
जन जन में उमंग जगाती

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सबसे बोलो शुभ प्रभाती
लोभ, लाभ लत न लुभाती

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देखना चाहते हो सूरते मुस्कराती
सभी से कहते चलो शुभ प्रभाती

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सब से बोलो शुभ प्रभाती
महनत में मस्ती मदमाती

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सब से बोलो शुभ प्रभाती
माफी मैं गल जाये गलति

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सब से बोलो शुभ प्रभाती
सब से बोलो शुभ प्रभाती
जन जन से जुड, जगत जगाती

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सबसे बोलो शुभ प्रभाती
भला होगा, भली भाँति

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सबसे बोलो शुभ शुभ प्रभाती
अगर मगर कर जाये अघाती

सबसे बोलो शुभ प्रभाती
जीवन में पाओगे ख्याति

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सबसे बोलो शुभ प्रभाती
हो जाये, हरियाली धरती

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सबसे बोलो शुभ प्रभाती
खुशी आयें, भाँति भाँति

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सबसे बोलो शुभ प्रभाती
एक अदभुद कर्म करामाती

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सबसे बोलो शुभ प्रभाती
मुस्करायें मनमीत की मति

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सबसे बोलो शुभ प्रभाती
सुधरे नियत, सुधरे नियति


सबसे बोलो शुभ प्रभाती
तुम्हरि सूरत लगे लुभाति

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सबसे बोलो शुभ प्रभाती
जलन भावना घटती जाती

जलन जंग नहीं करवाती
खत्म हो जलु सी ख्याति

सबसे बोलो शुभ प्रभाती

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सबसे बोलो शुभ प्रभाती
सीरत यह सबको सूहाती

चमत्कार चमके, चमकाये
दुश्मन भी हो जाये साथी

सबसे बोलो शुभ प्रभाती

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सबसे बोलो शुभ प्रभाती
नियती में प्रकटे प्रभाती

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सबसे बोलो शुभ प्रभाती
आसाये आसानी से आती

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सब से बोलो शुभ प्राभाती
जतादो जिन्दागी की जागरुति

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सब से बोलो शुभ प्राभाती
सरलता, सहजता समाती

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सब से बोलो शुभ प्राभाती
विपदायें आना थम जाती

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शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

संघर्षी, सच्चे अन्ना (बडे भाई) के संघर्ष पर

संघर्षी, सच्चे अन्ना (बडे भाई) के संघर्ष पर
मानव की एकता,
मानव क्या,
भगवन है देखता
यैसे मानव,
मानव समाज का,
भाग्य है लिखता.... "प्यास"

गर कुछ है बनाना, बनना,
बन ही जाओ अन्ना .

सत्य साथ साथ चलो,
चलते रहो, न रूकना .

मानव ले, मानवता ले,
हो मानव का धरना ,

भ्रष्टाचार को झंझोडो,
आगे कभी न झुकना ,

भ्रष्टो का भंडार हो तो,
क्रांती ले है उगना, क्रान्ती ले जगना ..... "प्यास"

बापू का भारत, गुलामी से आजादी
अन्ना का भारत, भ्रष्टो से आजादी
अब बस मानव होना ही बाकी होगा
मानव का भारत, द्वेषो से आजादी.... "प्यास"

सोमवार, 20 जून 2011

जब जब बुद्धी भर्ष्ट हुई

जब जब बुद्धी भर्ष्ट हुई
तब तब नियती दुष्ट हुई

जब जब नियत पुष्ट हुई
तब तब जीवनी उत्कुष्ट हुई

जब जब प्यास नष्ट हुई
तब तब जीवनी बेकष्ट हुई

सोमवार, 3 जनवरी 2011

बीज को चाहिये तावीज, तब ही उगे है बीज

बीज को चाहिये तावीज, तब ही उगे है बीज
उग जाये, असल बीज है
न उगे , खुदा हाफिज है
बीज को जो ताड बनाये,
वही देता येसा ताविज है...."प्यास"


दुख हमेशा द्स्यु सा, परम सुख मृत्यु सा.
जिन्दगी निराशायें देते देते मृत्यु दे गई
समस्त निराशाको का अंत मृत्यु दे गई...."प्यास"

करले कबूल, बबूल
भूल फूल, चुनले सूल
करले मूल प्रीत कबुल...."प्यास"

बाग नशीले फूल दे, जंगल जीवन मूल दे
मना जगंल में, मगंल
बागो में भयंकर दंगल...."प्यास"

मुझे लगे वह खास सी दुनिया
किसी के मन में, आवास की दुनिया
किसी के प्रीत के आभास की दुनिया...."प्यास"